मेरे कृष्ण ना अब तेरा वियोग सहन होता हैं
मुझसे ना व्यवहार दुनिया का वहन होता हैं
संभाल अपने ब्रह्मज्ञान को मेरा जीवत्व मुझे लौटा दे
प्रेम ही मेरा खरा सिक्का अब ज्ञान ना तू खोटा देविरह में तेरे एक पल भी जीया नहीं जाता
प्यार का तीखा विष किसी भी घडी पीया नहीं जाता
काश उजडती बसती दुनिया के झंझट से निकल पाती
टूटी मेरी आशाओं को कहीं अब दरकिनार कर पाती
बची खुची मेरी जिंदगी मै भी कुछ जी जाऊ
दर्द मेरे रोंए रोयें में पर होठो को सी जाऊ
बहता हैं सागर सा गम पल में पी जाऊ
क्या हुआ अगर मैं तेरी मजिल नहीं थी
क्या श्याम मैं तेरे लिए अजनबी कही थी
विरह की मेरी वेदना मौत तक ले जाएगी
विरह की मेरी वेदना मौत तक ले जाएगी
सफ़ेद शांति सी मेरी अर्थी कुछ ना कह पायेगी
मुझे रोना हैं अपनी शवयात्रा में क्योंकि दर्द तो मैं ही जानता हूँ
बचा सकता था इश्वर मेरी आत्महत्या इतना मैं मानता हूँ
भगवान् होना तेरा बहुत सह लिया
ज्ञान गुणगान तेरा बहुत कह दिया
एक आवारा सा जीवन बिताने को कह रही हूँ
मेरी तमन्नाओ में मिट जाने को कह रही हूँ
क्या राधा का रोना तू देखता ही रहेगा
विरह का ये दर्द कब तक उसका दिल सहेगा
रोज़ लुटती हो जो भावो को कब तक सहेजेगी
सच कह रही हूँ आज के बाद ना राधा बचेगी
वेदनाओ का ये कैसा ज्वार मेरे रोम रोम में बहा हैं
तू पटरानियो का श्रीकृष्ण मेरा ना अब श्याम रहा हैं
द्वारिकाधीश होना तेरा इस राधा ने खुद भी तो सहा हैं
क्या मेरी कविता में "वीरेन" ने तुझे वृन्दावन का ग्वाल कहा हैं भगवान् होना तेरा बहुत सह लिया
ज्ञान गुणगान तेरा बहुत कह दिया
एक आवारा सा जीवन बिताने को कह रही हूँ
मेरी तमन्नाओ में मिट जाने को कह रही हूँ
क्या राधा का रोना तू देखता ही रहेगा
विरह का ये दर्द कब तक उसका दिल सहेगा
रोज़ लुटती हो जो भावो को कब तक सहेजेगी
सच कह रही हूँ आज के बाद ना राधा बचेगी
वेदनाओ का ये कैसा ज्वार मेरे रोम रोम में बहा हैं
तू पटरानियो का श्रीकृष्ण मेरा ना अब श्याम रहा हैं
द्वारिकाधीश होना तेरा इस राधा ने खुद भी तो सहा हैं
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!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे
1 टिप्पणी:
विरह भाव को बखूबी प्रस्तुत किया है।
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