बुधवार, 15 सितंबर 2010

राधा जी का जवाब ( कविता

यह कविता श्रीमती वंदना गुप्ता जी की ब्लोग्पोस्ट के जवाब में हैं . असल में टिपण्णी ज्यादा बड़ी हो रही थी . इसीलिए मजबूरीवश ऐसा करना पड़ा .वंदना जी के के पोस्ट का लिंक ये हैं . वैसे जरुरी हैं कि मेरे जैसे निम्न स्तर के व्यक्ति से पहले आप उनकी अद्भुत रचना को पढ़े तो तारतम्यता भी बनी रहेगी .
http://vandana-zindagi.blogspot.com/2010/09/blog-post_15.html

प्रभु हमने आपसे ना कभी रखी कुछ चाह
दुःख हमारा बस थी सच्चे प्रेम की आह
आप तो सर्वसमर्थ थे फिर क्यों नियमो की आड़ देते हो
समाज के अंगो की बिसात आप तो भावो से ही ताड़ लेते हो

आपकी सारी बाते सही पर इसमें राधा का कसूर बताओ
पुरुष प्रधान दुनिया में पिसती रहे जरा दस्तूर समझाओ
जब परमसत्ता तू ही हैं तो फिर क्यों तर्क देता हैं
भविष्य राधा का तू फिर क्यों ना अत्तीत देता हैं

साधना जिसकी तू ठुकरा कर भाग गया
शायद झूठा तेरा कर्मयोग तुझे जाग गया
व्यवहार पर खरा उतरा लोगो के फिर भावो को क्यों नहीं देखा
धोबी का तुझे पूरा ध्यान दिखी ना राधा के दिल की रेखा
सीता ही तो परीक्षा देती रही सदा यहाँ
मर्यादापति के भाग्य में भला ऐसा सौभाग्य कहाँ
वृन्दावन की राधा ही तो प्रतीक्षा करेगी
समर्थ कृष्ण से ना ये कभी प्रथा निभेगी

कृष्ण चाहे तर्कों से बात करे पर राधा को इनसे क्या मतलब हैं
सिर्फ भावो के दम पर वो लुट गयी कहाँ ज्ञान का कोई करतब हैं
सामर्थ्य की परमसत्ता होकर भी राम कृष्ण क्यों बहाने बनाता हैं
टूटती किस्मत सी बनकर सीता राधा सा जीव लुट जाता हैं

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!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे

3 टिप्‍पणियां:

SANJEEV RANA ने कहा…

ek baar fir bahut hi bhaavpuran rachna

jai SHRI KRISHNA

vandana gupta ने कहा…

वीरेन्द्र जी,
मैने तो कृष्ण राधा दो अलग स्वरूप बताये ही नही……………जब अलग हैं ही नही तो विछोह कैसा?
ये तो जगत के लिये बताया है कि मानव बनकर यदि भगवान भी धरती पर अवतरित हुआ तो इस दुनिया ने उसे भी नही छोडा तो हम जैसे तुच्छ प्राणी की क्या बिसात्…………………धरती पर आकर तो भगवान को भी धरती के नियम ही निभाने पडे……………ये दुनिया किसी की सगी नही है फिर वो चाहे भगवान ही क्यों ना हो………………जहाँ तक प्रेम की बात है तो उसकी दिव्यता तक तो हम पहुँच ही नही सकते उस अनन्य प्रेम को समझना हम मनुष्यों के बस की बात नही है।

वैसे कविता के भाव बहुत ही सुन्दर बने हैं ……………आपके प्रेम को नमन्।

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ ने कहा…

!!!!!

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...