सोमवार, 15 मार्च 2010

ब्रज यात्रा भाग चार - मथुरा जन्मभूमि

मथुरा जाने के लिए दिल्ली से सीधी आगरा की बसे मिलती हैं जो आपको हमेशा मथुरा बाई पास पर उतार देती हैंसीधी अंदर बस स्टैंड मथुरा की बसे भी मिल जाती हैंट्रेन से भी लगभग यही रास्ता हैं ,खैर आप कहीं भी उतरे पर मथुरा जन्मभूमि तो आपको हर जगह से पास पड़ती हैंमथुरा बाई पास को वैसे गिरिराज चौक या चौराहा या गोवर्धन चौक भी बोलते हैंमथुरा में दर्शनीय स्थल हैं जन्मभूमि , द्वारिका धीश मंदिर , कंस का किला और विश्राम घाट

सबसे पहले जन्मभूमि चलते हैंगिरिराज चौक या बस स्टैंड से या रेलवे स्टेशन से आप रिक्शा लेस्टेशन वैसे सबसे पास पड़ता हैं , पैदल भी जा सकते हैंजन्मभूमि में अंदर घुसते ही आपको विशाल प्रांगण दीखता हैंआप इसके बाद सबसे पहले एक देवी मंदिर बनाया हैं उसमे से प्रवेश करके सीधे योगमाया मंदिर के दर्शन कर सकते हैंयोग माया वही हैं जो यशोदा जी के गर्भ से उत्पन्न होकर वासुदेव जी द्वारा मथुरा लायी गयी थी , जिन्हें कंस ने फेंकने की कोशिश की थीइसके बाद गर्भ गृह में प्रवेश कीजियेआप तंग गुफा में प्रवेश करेंगेथोडा चलने पर गर्भ घर में भगवान् कृष्ण के दर्शन होंगेयही मुख्य मंदिर हैं जो जन्मभूमि का मूल मंदिर हैं

यहाँ से निकलने के बाद आप यहाँ के सत्साहित्य स्टाल पर समय लगा सकते हैंकुछ खरीदना चाहे तो खरीद सकते हैंइसके पश्चात भागवत भवन , झांकी स्थल और गुफा झांकी वाला मंदिर हैंतीनो में से किसी एक को चुन लेझांकी स्थल में पंद्रह बीस मशीन से चलने वाली झांकी हैं जो बहुत ही अच्छी लगता हैंगुफा झांकी वाले में गुफा के अन्दर काफी मनमोहक झांकी हैं

अब भागवत भवन की बात करेंयहाँ सिर्फ भगवान् कृष्ण और राधाजी की युगल मूर्ति हैंइसी मूर्ति के दर्शन हम जन्माष्टमी के दिन टी वी पर करते हैंयह बहुत मोहक और विहंगम मंदिर हैंइसकी साज सज्जा प्रसिद्ध भागवत विदवान और गीता प्रेस गोरखपुर के संयोजक श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने करवाई थीगेट पर हनुमान प्रसाद पोदार जी का , मदन मोहन मालवीय जी का और गाँधी का शारीरिक ढांचा बनाया गया हैंयह मंदिर वाकई जबरदस्त हैं

अब जन्मभूमि से दस बारह दूकान छोड़कर पोतड़ा तालाब हैं जहाँ कभी भगवान् कृष्ण के जन्म के समय कपडे धोये गए थीइसका आकार बहुत बड़ा हैंइसके बाद आप रिक्शा से द्वारिका धीश मंदिर जा सकते हैं जो मथुरा में काफी अंदर हैंकंस का किला और विश्राम घाट यमुना जी के पास पड़ते हैंसुविधानुसार वहां जा

अब मेरी ब्रज यात्रा की चारो पोस्ट संक्षेप में विराम लेती हैंये सब तो मुख्य मुख्य मंदिर थेआगे कभी अवसर मिला तो मंदिर विशेष के नाम से पोस्ट डालूँगा . हाँ गिरिराज जी या गोवर्धन की जानकारी मैं किसी पोस्ट में नहीं डाल पाया हूँ , असल में मैं यहाँ बचपन में गया था तो वहां की याद बहुत धुंधली हैं। खानापूर्ति करने के लिए डाल देता लेकिन ये वास्तविक दर्शन से अन्याय हो जाता । अगर कभी वहा जाना होगा तो एक पोस्ट गिरिराज जी पर भी लिख दूंगा। यह चारो पोस्ट तो सिर्फ थोड़ी मूल जानकारी देने के लिए डाली थी । कुछ गलती के क्षमा करे और मार्गदर्शन दे । मुझे इतना झेलने के लिए श्री राधाजी का हार्दिक धन्यवाद

राधे राधे
श्री राधे जय राधे प्रेम अगाधे श्री राधे

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

आभार जानकारी का.

kunwarji's ने कहा…

aa gaye sir blogvaani par
badhaai hi sir .....

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...