शनिवार, 6 मार्च 2010

दैनिक कड़ियाँ भाग तीन

सब ट्रकों के पीछे अधिकतर लिखा रहता हैं , बुरी नज़र वाले .... आदि आदि कल मानेसर जाते हुए एक ट्रक पर काफी अच्छा सन्देश लिखा था
" ना किसी की बुरी नज़र ना किसी का मुह काला
सबका भला चाहे गाड़ी नं ........... वाला

जब छोटे थे तो एक दोस्त ने बताया था की उसने एक तिपहए पर लिखा देखा था
" बुरी नज़र वाले तेरे बच्चे जीयें
हो के खड़े रोड पे देसी शराब पीयें

गुडगाँव
के सेक्टर चार के बाज़ार वाले रोड में एक गली के गेट पर अनोखा ही सन्देश लिखा हैं
" यह आम रास्ता नहीं हैं , भिखारी व् सेल्समैन कृपया अंदर ना आये " सेल्समैन को भिखारी के बराबर पहली बार देखा. इसे देख कर सेल्समैन तनाव का शिकार हो सकते हैं.

निरमा कम्पनी कि नयी एड में कमाल ही दिखाया कि कीचड़ निरमा पावडर का नाम सुनते ही लड़की कि साड़ी से दूर ही रहता हैंऐसे कई एड तो वाकई घटिया करार दिए जाने चाहिए

हालाँकि कुछ एड काफी मनोरंजक भी होते हैंजैसे Max New York life insurance में एक माता पिता अपने किशोर बेटे को छोड़ने ट्रेन में बैठाने आते हैंलड़का बेचारा पहले से बैठी लड़की के सामने जबरदस्त शर्मिंदा होता हैं जब अधिक प्यार करने वाली माँ उसे कई सावधानिया बताती हैं कि बेटा केला खा लेना इससे पेट साफ़ रहेगा और अपने गंदे कपडे जैसे अंडरवेयर अलग बैग में रखनामतलब बेचारे कि सही मिटटी पलीद होती हैं

कुछ दक्षिण भारतीय फिल्म जब हिंदी में डब करके दिखाई देती हैं तो उनके शीर्षक बड़े खतरनाक लगते हैंजैसे कल शनिवार को ऐसी ही एक फिल्म का नाम था " मेरी बदले की आग " । एक तो ऐसी फिल्मो में हीरो बस कुटाई पिटाई बहुत करता हैंऔर सारी फिल्म बेमतलब की हिंसा से भरी होती हैंआपने भी शायद देखि होंगीएक तो नागार्जुन दूसरा चिरंजीवी और तीसरे अपने रजनीकांत जी तीनो की फिल्मे इतने लात घूसों से भरी होती हैं की मिथुन या धरमेंदर की फिल्मे भी फेल हो जाएऐसे कुछ स्तर की फिल्मे और ऐसे ही दक्षिण भारतीय नायक छुट्टी के दिन चार पांच चैनल पर कब्ज़ा जमा लेते हैं

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सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...