वैसे मैं इन हिन्दू मुस्लिम बन्दों से थोडा दूर रहता हूँ क्योंकि मेरे जैसा भावुक व्यक्ति हर समय बेमतलब ईश्वर प्रेम को बीच में ले आता हैं । अभी दो तीन हफ्ते से शायद सावरकर जी पर हिन्दू मुस्लिम जगत में पुनर्जन्म को लेकर काफी बहस हो रही हैं । हमेशा की तरह कुंवरजी को भी इस चीज़ ने परेशान किया होगा और वो भी मजबूर हो गया होगा क्योंकि हम मनुष्य हैं एक हद तक ही किसी चीज़ को सहन कर सकते हैं । इसी कड़ी में मैं मुझे भी लिखना पड़ गया ।
हालाँकि मेरे जैसे काम चलाऊ ब्लॉगर की टिपण्णी से कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ता । लेकिन पुनर्जन्म और हिन्दू मुस्लिम मुद्दा क्या हम लोगो को पूरा पूरा पता हैं ? मुझे तो सच बताऊ ये आप सबका एक मनोरंजन का जरिया लगता हैं । खुद जब कृष्ण कहते हैं की ऐसा कभी नहीं हुआ हैं की हम ना रहे हों , हम सब सदा रहते हैं . अब कोई सोचे सावरकर का पुनर्जन्म अगर पाकिस्तान आदि देश में हो तो इसका मतलब यही तो हैं की एक पिछले जन्म का हिन्दू अब मुस्लिम परिवार में जन्म ले रहा हैं . अर्थ ये हुआ की जीव किसी धर्म या देश की परिधि में नहीं आता . वो हमेशा रहता हैं
मेरे जैसे भावुक व्यक्ति के लिए तो टिपण्णी करना बड़ी मुसीबत हैं . टिपण्णी करने जाता हूँ और ब्लोग्पोस्ट से भी लम्बी हो जाती हैं . अभी आज भी ऐसा ही हुआ हैं, फिर मैंने टिपण्णी हटा दी नहीं तो हरदीप के पेज लोड होने में ज्यादा समय लगेगा . पी सी हैंग हो सकता हैं , गलती मेरी होती और कोसा हरदीप को जाता . हरदीप की पोस्ट ये हैं
http://hardeeprana.blogspot.com/2010/05/blog-post_11.html
मैं पहले हिन्दू मुस्लिम भाइयो से कहना चाहता हूँ की क्या उनकी ईश्वर अल्लाह से सीधी बात हो चुकी हैं कि आप ब्लॉग पर भी ये घृणित सम्वाद फैलायेंगे और वो आपसे नाराज़ नहीं होगा , क्या ईश्वर और अल्लाह दो अलग चीज़ें हैं और इनके अलग अलग ऑफिस हैं । मैं अपने जीवन में बहुत ज्यादा धर्म से जुड़ा और जितनी मेहनत इंजीनियरिंग में और मैनेजमेंट पर की उससे कही ज्यादा सिर्फ धर्म को समझने पर की । हम कुछ लोग जो आपस में चैट के थ्रू बात करते हैं , वो जानते हैं की कैसे कुछ मुस्लिम भाइयो ने ईश्वर प्रेम ( रसखान ,राबिया , शरमत ने हिन्दू धर्म के ब्रह्म ज्ञान को अपनाया ) और कुछ पूर्ण ईश्वर प्राप्त हिन्दुओ ने मुस्लिम धर्म में भी ईश्वर का सच्चा सार बताया । ऐसे और भी बहुत सी बाते हैं जो मैं दस या पंद्रह साल से देखता आ रहा हूँ । इतना लिखा जा सकता हैं सबमे प्यार बनाये रखने के लिए । मुझे तो सच में आंसू आ जाते हैं जब एक दुसरे के धर्म को बिना जाने बस छुरी चाकू लेकर पोस्ट मार्टम पर उतर जाते हैं हम लोग .
अगर सच में धर्म की रक्षा सिर्फ ब्लॉग की टिपण्णी से हो रही होती तो पांच साल पहले तो हिन्दू मुस्लिम धर्म शायद खतरे में होते । ये हमारा मानवीय स्वाभाव और कलयुग का समय चीजों को समझने नहीं देता । मैं शरीर से एक हिन्दू होने के कारन सारे अपने ग्रंथो को पढता गया और जीवन में उतारता भी गया । मुझे कहीं किसी हिन्दू धर्म की पुस्तक में नहीं लिखा दिखा कि मुस्लिम से घृणा करो । ये सिर्फ कुछ बुरे लोग मुस्लिम धर्म में आये उनसे मैं नफ़रत तो खैर नहीं बस ये सोचूंगा कि इनका रास्ता अलग मेरा अलग , अगर कही कुछ गलत लगा तो जरुर विरोध करूँगा पर मुस्लिम मुस्लिम नहीं चिल्लाऊंगा ।
सहिष्णु हिन्दू होना ख़राब लगता हैं और लगता हैं कि ऐसे तो हिन्दू संकट में हैं तो पहले हिन्दू संतो या हिन्दू ईश्वर राम कृष्ण से भी पूछ कर देखा तो यही जवाब आया कि जो हिन्दू मुस्लिम मुद्दों पर लड़ते हैं उन्हें अभी मेरी ( ईश्वर की ) ताकत का पता नहीं हैं । मैं अपने साथ पढ़े मुस्लिम दोस्तों से बात करता हैं , उनमे से कई तो खुद में भी गहरा अपराध बोध लिए हुए रहते हैं कि कुछ बुरे लोगो कि वजह से शर्मिंदगी उठानी पड़ रही हैं । और देखिये क्या हमें राज ठाकरे जैसे घ्रणित राजनीति करने वाले हिन्दू पसंद हो सकते हैं ।
हम सबका दर्द एक हैं फिर क्यों हम एक दुसरे को बेमतलब तंग कर रहे हैं । मुझे सुरेश चिपलूनकर जी के लेख बहुत अच्छे लगते थे क्योंकि उनमे कोंग्रेस सरकार की हरामखोरी कि बाते सच थी । पर वहा भी मेरे जैसे भाइयो ने बस टिपण्णी में लड़ाई झगडा शुरू कर दिया तो वो भी मैंने पढना बंद कर दिया ।
अब रही बात पुनर्जन्म की , सिर्फ सच ही बोलूँगा कुछ घुमा फिराकर नहीं । कोई भी व्यक्ति हो , जब तक वो मुक्त या ईश्वर अल्लाह को प्राप्त नहीं होगा उसका पुनर्जन्म होगा चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम हो या ईसाई , और ये धार्मिक विचार हैं , मुझे आपकी टिपण्णी का लोभ नहीं , और ये धार्मिक मंच हैं यहं गप्प लगाना अपने पुण्यो का नाश करना हैं । और पूरी जिम्मेदारी लेनी पड़ती हैं अपने कहे हुए की । मुझे ख़ुशी हैं की मैं ऐसे गुरु अपने बापूजी संत श्री आशारामजी का शिष्य हूँ जिसने मुझे विपरीत परिस्थिति में भी अकेला पड़ जाने पर गलत और सही का विवेक करना सिखाया । जिनसे सारे संत स्नेह करते हैं । ये निर्णय जिसने लिखवाया वो ही आपको समय के साथ आगे बढ़ाएगा । एक विदेशी महिला जो हमारे देश को जानती नहीं एक युवक जो उसका बेटा हैं दोनों शायद कुछ भी नहीं जानते हमारे देश के बारे में फिर भी अपने पुनर्जन्मो के कारन राष्ट्र के सर्वेसर्वा हैं । नहीं क्या आपको नहीं लगता कि सिर्फ दो लोगो के हाथ मेरा पूरा देश और क्या योग्य व्यक्ति नहीं होंगे हमारे देश में ।
अपने जीवन को पहले थोडा ईश्वर से जोड़े अल्लाह से जोड़े फिर हिन्दू मुस्लिम से जोड़े , शब्दों के बजाय भाव से कहे । कोरे शब्दों से ज्ञान नहीं मिलता । टिपण्णी रुपी माया के चक्कर में ना आये । यह कहीं का ना छोड़ेगी । आपके श्री चरणों में ईश्वर का एक पैगाम । आपके पुण्य हैं जो इश्वर ने मुझे विवश किया । धन्य हैं आप लोग . but please dont try to judge me as something may be beyond dimension of your perception . आपकी सेवा समाज के बड़े काम आने वाली हैं
और ये सब बाते मैं जानता हूँ कि आप शायद छः लोग ही पढेंगे सिर्फ आपके लिए हैं ,हरदीप , श्री समीर लाल सर , वंदनाजी , संजीव राना , कुलवंत हैप्पी ( शायद ) और अब जो मैं जानता ही नहीं कौन हैं वो नोर्वे में हैं और ओस्ले शहर में रहते हैं , कृपया वो कभी तो मुझे मेल करे , उनको थैंक्स बोलना हैं
virender.zte@gmail.कॉम
वैसे किसी को भी मेरे विचार पसंद ना हो तो मुझे बुरे शब्द लिख कर भेज सकते हैं मैंने टिपण्णी मोडरेशन नहीं लगाया हैं । पर कभी तो सोचो " एक नूर ते सब जग उपज्या कौन भले कौन मंदे "
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
-
सुबह सुबह लोग भक्ति के संगीत में डूबने का नाटक करते हुए उस भगवान् को बेवक़ूफ़ बनाते हैं जो हम सबसे ज्यादा चालाक हैं और...
-
सबसे पहले तो आप का धन्यवाद जो आपने अपना कीमती समय ख़राब करने की ठान ही ली हैं । दूसरा सरल कुमार जी बेचारे महत्वाकांक...
-
सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
4 टिप्पणियां:
ठीक कहा आपने
मैंने भी अभी इन सब से दुखी होकर सलीम खान के लिए कुछ लिख छोड़ा हैं और प्रार्थना की हैं की ये सब बंद हो जाये
इससे क्या होगा हांसिल
agyanta jab tak rahegi ye sab chalta hi rahega aur humjaise log kitna hi koshish kar lein ye kabhikhatam nhi hoga kyunki ye sab satyug se hi chala aa raha hai aur aage bhi naajane kitne kalpn tak chalta hi rahega .........hamein to sirf apni soch ko sahi disha deni hai aur apne karmon ko sahi disha mein lagana hai tabhi jeevan ki sarthakta hai ........aap kisi se prarthna kar lijiye ya kisi ko dhamka lijiye jinki jo fitrat hai use nahi badal sakte jab tak ki wo khud hi badlna nahi chahe ..........phir bhi aapka prayas ek sarthak disha ki ore hai.
छह के अलावा कोई और भी पढ़े तो? :)
मान कर चलें कि हठी व कूतर्की को समझाना असम्भव होता है.
रात में सूरज को तरसता हूँ,
दिन में धुप से तड़पता हूँ!
आखिर क्या होगा मेरा.....?
मै हूँ कहा इस यात्रा में....?
कुंवर जी,
एक टिप्पणी भेजें