हर व्यक्ति के लिए प्यार करना संभव नहीं क्योंकि करना एक बलात प्रक्रिया हैं और प्रेम एक स्वाभाविक । फिर जब लेखक कि भी गहरी मानवीय संवेदना इसमें जुड़ जाती हैं तो एक रचना का निर्माण होता हैं । वो कहते हैं ना कि आपका दुःख भी एक मनोरंजन का स्रोत बन जाता हैं औरो के लिए । पर इसमें सारा श्रेय तो ईश्वर का ही हैं क्योंकि बुद्धिमानो की बुद्धि वो ही तो प्रेरित करता हैं । खैर ज्यादा बोर ना करते हुए आपके श्री चरणों में ये भाव समर्पित हैं । इसी कड़ी की आठवी कविता का लिंक हैं
http://saralkumar.blogspot.com/2010/05/blog-post_11.html
और अब नौवी कविता
दर्द से भरा मेरा सागर जब बह जायेगा
अस्तित्व मेरा तेरे सपनो में आकर कह जायेगा
मुझे तो भगवान् तुम्हारे लिए संसार में लाया था
एक मैं ही तेरा अपना और जग पराया था
मेरी आँखों में अपने आंसू देख तो सही
कभी सोच उन बातो को जो मैंने कही
मजबूत दिल वाला मैं कैसे ढह गया
दर्द तेरे दिल का था और मैं सह गया
सोचा कभी तुने इसमें मेरा क्या स्वार्थ था
तेरी ख़ुशी के लिए मेरा भाव परमार्थ था
तेरे अलावा ना मैं किसी के लिए ऐसा कर सकता था
सिर्फ श्री हरि के लिए ही मैं भवसागर तर सकता था
विरह मेरे दिल का लिए तेरा इंतज़ार करता हूँ
मंजिल हो जिसकी तू ,वो राह तैयार करता हूँ
जिंदगी को बस सारे राह बर्बाद करता हूँ
मिट कर खुद बस तुझे आबाद करता हूँ
समझ मुझे कोई नहीं पाया कितना बड़ा दुःख था
तुझे तसल्ली ही तो देने गया इसमें मेरा क्या सुख था
क्या मुझे अच्छा होने की ही सजा मिल गयी थी
कमजोर तो तू थी , जमीन क्यों मेरी हिल गयी थी ।
और कुछ भाव होंगे तो आप लोगो के साथ शेयर करूँगा । मुझे भी पता हैं कि मेरी कविताओ में समरसता हैं , इससे आपको बार बार लगता होगा कि हर बार वही बात बस शब्द ही अलग होते हैं । पर क्या करू , रचना में सारी प्रेरणा एक भाव को लेकर ही हैं । इसीलिए ऐसा हो रहा हैं । खैर आप तो भले लोग हैं । इस कविता को भी झेल लेना प्लीज़ । आप का भला होगा । ख़ास बात ये कि जिसके लिए ये सब लिखा जा रहा हैं , उसे कविता कभी ज्यादा समझ ही नहीं आती थी क्योंकि वो एक आधुनिक सोच वाली व्यावहारिक लड़की थी । कल्पना कितनी सजीव बना देती हैं चीजों को ।
धन्यवाद
वीरेन्द्र
शुक्रवार, 14 मई 2010
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
-
सुबह सुबह लोग भक्ति के संगीत में डूबने का नाटक करते हुए उस भगवान् को बेवक़ूफ़ बनाते हैं जो हम सबसे ज्यादा चालाक हैं और...
-
सबसे पहले तो आप का धन्यवाद जो आपने अपना कीमती समय ख़राब करने की ठान ही ली हैं । दूसरा सरल कुमार जी बेचारे महत्वाकांक...
-
सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
2 टिप्पणियां:
उम्दा प्रस्तुती,ब्लॉग को सार्थकता की ओर ले जाती पोस्ट /
pyar aisa hihota hai jiske liye jo mehsoos kiya jaye use pata hi nahi chalta aur koi zindagi kurban kar jata hai.
vaise mazaa bhi aise hi pyar mein hai............jaan de bhi do aur use khabar bhi na ho.
एक टिप्पणी भेजें