शुक्रवार, 21 मई 2010

प्रेम कविता ( भाग दस ) राधा जी की कृष्ण को समर्पित कविता

कुछ लोग ज्ञान को बड़ी भारी वस्तु बना देता हैं । असल में तो ज्ञान ही तो चीजों को सरल बना देती हैं । भक्ति और ज्ञान और प्रेम सब एक ही हैं । जब आप परम ज्ञानी हो तो आप पर प्रेम प्रगट होगा , या यूँ कहले की इनमे द्वैत क्यों लाया जाया जब ज्ञान में सब अद्वैत हैं तो प्रेम और ज्ञान में भिन्नता क्यों । सब एक में समाहित हो गया तो फिर अंतर प्रमाणित करने के लिए क्यों वातावरण तैयार करना ।
अभी बात प्रेम की ही करते हैं । राधा जी तो परम ज्ञानी हैं । वो परम भागवत हैं । मुझे प्रेरणा मिली और इस रचना का निर्माण हो गया । अब क्योंकि प्रेम पर ही आधारित हैं तो उसकी कड़ी में ये दसवी कविता होगी ।
नोवी कविता का लिंक ये हैं
http://saralkumar.blogspot.com/2010/05/blog-post_14.html

प्यार पर दसवी कविता

अश्रु के ये मोती लिए तेरा इंतज़ार करती हूँ
वृन्दावन के ग्वाले मैं तुझे प्यार करती हूँ

मन हरने वाले तुने प्राण क्यों ना हर लिए
अब दुःख होता हैं तेरी याद में राधा क्यों जिए

मथुरा क्या गया अपनी राधा को भूल गया हैं
तुझे पाने का अब राधा का सपना टूट गया हैं

सोने के महल तुझे तो लगता हैं भा गए
झाड़ वृन्दावन के मुझे रास गए

हजारो रानियाँ तू समुन्द्र से भी घेर लाया था
ढाई कोस दूर की राधा को ना देख पाया था

राधा ने तो अपना सर्वस्व तुझ पर छोड़ दिया था
अपनी हर मंजिल का रास्ता तुझ तक मोड़ दिया था

मेरे कृष्ण तेरे दर्शन की मै सदा प्यासी हूँ
विरह से उपजी प्यास बस आंसुओ से बुझाती हूँ

नटखट कान्हा तुझे मैंने किस घडी वर लिया था
क्यों एक छिछोरे में अपना मन धर लिया था

अगर मैं रूठ गयी तो तेरी बंसी की तान बिगड़ जाएगी
राजकुमारिया भले तुझे मिल जाये पर ये ग्वालिन बिछड़ जाएगी

राधा राधा बस इतने शब्द तेरे सुनने को मेरे कान तरस जाते हैं
मेरे कृष्ण मेरे कृष्ण जैसे स्वर होठो से बरस जाते हैं

अभी के लिए राधा जी ने इतनी ही प्रेरणा दी हैं । बाकि उनकी कृपा रही तो बात और आगे तक बढ़ेगी ।
धन्यवाद ,
वीरेंद्र

4 टिप्‍पणियां:

SANJEEV RANA ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
SANJEEV RANA ने कहा…

बहुत अच्छा वीरेंदर जी
राधा जी आपको ऐसे ही प्रेरणा देती रहे और आप ऐसे ही भजनों और कविताओ का हमें भी रसपान कराते रहे .
आभार

vandana gupta ने कहा…

prem jab ananat ho gaya
to rom rom sant ho gaya
devalay ban gaya badan
hriday to mahant ho gaya.


sundar bhavavyakti.

kunwarji's ने कहा…

कोई सच्चा और बहुत अधिक करीब का अपना ही किसी अपने को ऐसे उल्हाने दे सकता है जी.....

कुंवर जी,

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...