इस गीत को गाया हैं मोहम्मद रफ़ी ने । आज 26 जनवरी हैं इसीलिए सोचा कि देशभक्ति से भरा गीत दोहराया जाए ।
तू हिन्दू बनेगा ना मुसलमान बनेगा इंसान कि ओलाद हैं इंसान बनेगा
अच्छा हैं अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं हैं ,
तुझको किसी मज़हब से कोई काम नहीं हैं
जिस इल्म ने इंसानों को तकसीम किया हैं
उस इल्म का तुझ पर कोई इलज़ाम नहीं हैं
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा , तू हिन्दू बनेगा ........
मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया
हमने उसे हिन्दू या मुसलमान बनाया
कुदरत ने तो बख्शी थी हमें एक ही धरती
हमने कहीं भारत कहीं इरान बनाया
जो तोड़ दे हर बंद वो तूफ़ान बनेगा, तू हिन्दू बनेगा ....
नफरत सिखाये जो धर्म तेरा नहीं हैं
इन्सां को रौंदे वो कदम तेरा नहीं हैं
कुरान ना हो जिसमे वो मंदिर नहीं तेरा
गीता ना हो जिसमे वो हरम तेरा नहीं
तू अमन और सुलह का अरमान बनेगा , तू हिन्दू बनेगा ....
ये दीन के ताजिर ये वतन बेचने वाले
इंसानों की लाशो के कफ़न बेचने वाले
ये महलो में बैठो हुए कातिल ये लुटेरे
कांटो के एवज रूह ऐ चमन बेचने वाले
तू इनके लिए मौत का एलान बनेगा , तू हिन्दू बनेगा .....
मंगलवार, 26 जनवरी 2010
तू हिन्दू बनेगा ना मुसलमान बनेगा , इंसान की औलाद हैं इन्सान बनेगा ( फिल्म धुल का फूल , 1959 )
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