बुधवार, 27 जनवरी 2010

आज गा लो मुस्करा लो महफिलें सजा लो ( ललकार फिल्म )

हिंदी फिल्मो में कई गीत बहुत ही संवेदनशील होते हैं । मैंने हमेशा अपने इस ब्लॉग में सिर्फ सार्थक और संवेदनशील गीत ही डालने की कोशिश की हैं , उन्ही में से एक हैं ये गीत जिसके गीतकार हैं हसरत जयपुरी । ये फिल्म थी ललकार जो सैनिकों के ऊपर बनी थी । इस गाने की पृष्ठभूमि ये हैं कि धर्मेन्द्र के बड़े भाई राजेंदर कुमार कि मृत्यु कि खबर से सब फौजी थोड़े दुखी होते हैं जिसके बाद धरमेंदर दारा सिंह आदि फौजिओं को संबोधित करते हुए ये गीत गाते हैं । जब धरमेंदर गाने के अंतिम दौर में होते हैं तो उनके पिता आ जाता हैं जो वाकई फिल्म के इस दृश्य को काफी भावुक बना देते हैं । इस गीत के बोल देखिये :-

आज गा लो मुस्करा लो , महफिले सजा लो
क्या जाने कल कोई साथी छूट जाए
जीवन की डोर बड़ी कमजोर
किसको खबर हैं कहाँ टूट जाए , गा लो मुस्करा लो ...........
टूटा हुआ तारा हैं नदिया की धारा
हैं कौन ऐसा जो लौटा के लाये
हमसे जो बिछड़ा हैं साथी हमारा
हैं कौन ऐसा जो लौटा के लाये
अब ये नज़र रास्ते से हटा लो , गा लो मुस्करा लो ...........
शहीदों का खून हैं वफ़ा की निशानी
ये आंसुओं से धोते नहीं हैं
ये मौत हैं नाज़ करने के काबिल
वीरो की मौत पे रोते नहीं हैं
आज यादों को उनके गले से लगा लो , गा लो मुस्करा लो ................

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