सोमवार, 25 जनवरी 2010

प्रेमाभक्ति की अनूठी बातें

प्रेमाभक्ति हमेशा ही आनंद का विषय रहा हैं , इसीलिए जो प्यार और विविधता इसमें हैं वो ज्ञान में दिखाई नहीं देती । अगर technical भाषा में कहे तो भक्ति customized हैं और ज्ञान by default हैं , मतलब ज्ञान में आप कोई राह नहीं बनाते बल्कि एक पहले ही बनाये रस्ते पर आगे बढ़कर इश्वर को पाते हैं जबकि भक्ति में कुछ भी नियम नहीं होंगे ,हमेशा सारे मायने बदल जाएंगे । ऐसे ही कुछ प्रसंग देखें :
एक महिला साधक का वर्णन प्रेम के बारे में
जो मैं ऐसा जानती कि प्रीत किये दुःख होए
मैं नगर ढिंढोरा पीटती कि तुम प्रीत ना करिहो कोए ।
रामायण में निषादराज गुह भगवान् से ही कह देते हैं कि प्रभु हमसे भक्ति के अपेक्षा ना करिए । हमारे तो दिन रात पाप करने में व्यतीत होते हैं और आप शुक्र मानिए कि हम आपके भोजन और वस्त्र चोरी करके नहीं ले गए ।
और भगवान् को गंगा नदी पार करवाने वाले केवट ने तो कहा कि चाहे मुझे लक्ष्मण जी बाण भी मारे तो भी मैं बिना श्री राम के चरण धुलाये नाव में नहीं बैठने दूंगा .

कबीर जी तो अनूठी ही बात कहते हैं ( हिन्दुओं के मूर्ति पूजा के बारे में )
पाहन पूजे ते हरि मिले तो मैं पूजा पहार
ताते तो चक्की भली पीसी खाए संसार
और मुस्लिमों के बारे में उन्होंने कहा कि
कंकड़ पत्थर जोड़ के ली मस्जिद बनाय
ता चढ़ी मुल्ला बांग दे क्या बहरा हुआ खुदाय।

तो इस प्रकार हमने इश्वर प्रेम के अनूठे प्रसंग देखे , ये थोडा संक्षेप में था । कुछ और मिला तो जरुर लिखूंगा

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