शनिवार, 9 जनवरी 2010

वंशावली भाग आठ - भगवान् के चौदह अंशावतार ( कपिल मुनि और वेदव्यास )

वंशावली भाग सात में हम नारद जी और सनकादी ऋषिओंके बारे में पढ़ चुके हैं । अब आगे की बात करते हैं ।

तीसरा अवतार ( भगवान् वेदव्यास ):-
पुरानो के रचयिता और धार्मिक ग्रंथों के सूत्रधार वेदव्यास जी हैं । जिनमे महाभारत और श्रीमद भगवत इनकी प्रिय रचनाये हैं । वैसे इनका जीवन परिचय मैं वंशावली भाग पांच में दे चुका हूँ कृपया वहां से सन्दर्भ ले। इस अवतार का प्रमुख उद्देश्य सिर्फ इश्वर के चरित्र को लिपिबद्ध करना tha । इन्ही के कारन आज हमारा धार्मिक साहित्य सब धर्मो से समृद्ध हैं । वैसे ये वाशिष्ठ जी के पडपोते हैं ।

चौथा अवतार ( भगवान् कपिल मुनि )

ब्रह्मा जी के अंश से कर्दम मुनि हुए । सबसे पहले मनु ( स्वयंभू मनु ) और उनकी पत्नी शतरूपा ब्रह्मा जी के अलग अलग दो भागो से प्रगट हुए । इनकी तीन बेटिया हुई । आकूति , प्रसूति और देवहूति । आकूति का विवाह रुचि प्रजापति से हुआ और प्रसूति का विवाह दक्ष प्रजापति से हुआ । ये वही दक्ष हैं जो माता पार्वती के पूर्वजन्म में उनके पिता थे और भगवान् शिव के पार्षद वीरभद्र ने जिनका यज्ञ विध्वंश किया था।

कर्दम मुनि का विवाह मनु जी की तीसरी बेटी देवहूति से हुआ । परम तेजस्वी दम्पति के घर पहले नौ कन्याओं का जन्म हुआ । इन नौ कन्याओं का विवाह ब्रह्मा जी के अंश से उत्पन्न नौ ऋषिओं जैसे मरीचि , वाशिष्ठ , पुलस्त्य आदि ऋषिओं से हुआ ।

नौ कन्याओं के बाद भगवान् कपिल मुनि का जन्म हुआ । ये आजन्म ब्रह्मचारी रहे । इनके जन्म के पश्चात कर्दम मुनि चले गए और देवहूति को बताकर गए ki उनका पुत्र कपिल ही देवहूति का उद्धार करेगा ।
फिर कपिल मुनि से उनकी माता ने दीक्षा ली और पूर्ण ब्रह्म को प्राप्त किया । सांख्ययोग कपिल मुनि की ही कृति हैं ।


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