शनिवार, 9 जनवरी 2010

वंशावली भाग नौ - चौदह अंशावतार

अभी तक हमने चार अंशावतारों के बारे में जाना अब आगे की चर्चा करते हैं ,

पांचवां अवतार ( अवतार दत्तात्रेय )
ब्रह्मा जी के छायापुत्र कर्दम मुनि और मनु जी की पुत्री देवहूति से उत्पन्न नौ कन्याओं में एक थी - अनसूया अनसूया जी का विवाह हुआ ब्रह्मा जी के नौ मानस पुत्रो में से एक से - ऋषि अत्री अत्री ऋषि और अनसूया के अंश से भगवान् विष्णु ने जन्म लिया भगवान् दत्तात्रेय के रूप में इस अवतार में शिवजी और ब्रह्मा जी ने विष्णु जी के भाई के रूप में जन्म लिया क्रमशः ऋषि दुर्वासा और चन्द्रमा
के रूप में
असल में तीनो देविओं ( माता पार्वती, माता लक्ष्मी और माता सरस्वती ) ने देवी अनसूया की परीक्षा ली थी जिससे वरदान स्वरुप त्रिदेवों को पुत्र रूप में पाया ये किसी भी दम्पति के लिए दुर्लभ और महान वरदान था देवी अनसूया को हम सब सती अनसूया के नाम से भी हम जानते हैं ये भगवान् राम के समय में भी रहे थे

भगवान् दत्तात्रेय परम सिद्ध के रूप में जाने जाते हैं परम ब्रह्मचारी होने के कारन इन परम तेजोमय विभूति ने हैहयवंशी राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन को शक्तिशाली होने का वर दिया पर बाद में ये राजा दुष्ट हो गया इसने जमदग्नि ऋषि के आश्रम में दुर्व्यवहार किया जिससे कुपित होकर विष्णु जी के ही पूर्णावतार भगवान् परशुराम ने सहस्त्रबाहु अर्जुन का वध कर दिया संक्षेप में भगवान् दत्तात्रेय जी का यही वर्णन हैं


छठा अवतार ( विश्वमोहिनी अवतार )

समुन्द्र मंथन से निकले अमृत को राक्षसों से बचाने के लिए भगवान् ने स्त्री रूप को धारण किया इस अवतार के बारे में भी आप सभी साधको को पहले से ही ज्ञात होगा

सातवाँ अवतार ( भगवान् धन्वन्तरी )

समुन्द्र मंथन के समय अमृत कलश को लेकर निकले भगवान् विष्णु ने अपना वैद्य शिरोमणि स्वरुप धारण किया और चिकित्सा के क्षेत्र को समृद्ध किया इनके बारे में सभी परिचित होंगे

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