सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

बना के क्यों बिगाड़ा रे नसीबा ( ज़ंजीर , लता मंगेशकर )

इश्वर से प्रेम बड़ी अनूठी बात हैं । हम सभी इश्वर से प्रेम तो करते हैं पर शिकायते भी पूरे दिल से करते हैं । यही तो आधार हैं जो धीरे धीरे हमें इश्वर के निकट ले जाता हैं और फिर वो हमेशा के लिए अपना बना लेता हैं । फ़िल्मी गीत वैसे तो ज्यादातर मनोरंजन के लिए ही बनते हैं पर कई गीत फिर भी बहुत अच्छे होते हैं । ऐसा ही एक गीत जो इश्वर से शिकायत करते वक्त जया भादुड़ी पर फिल्माया ये गीत लता जी की आवाज़ में बड़ा ही अभूतपूर्व लगता हैं । हरि शरणम् ही सर्वोपरि हैं । देखिये ये गीत :-

बना के क्यों बिगाड़ा रे बिगाड़ा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले

जो तुझको मंजूर नहीं था फूल खिले इस प्यार के
फिर क्यों तुने इन आँखों को रंग दिखाए बहार के
आस बंधा के प्यार जता के बिगाड़ा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले .................................

पाप करे इन्सान अगर तो वो पापी कहलाता हैं ,
तुने भी ये पाप किया फिर कैसे कहूँ तू दाता हैं
रहा दिखा के राह पे लाके ,बिगाड़ा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले ..............................

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