सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

हनुमान कालनेमि संवाद ( लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग )

भक्ति के प्रसंग मन को लुभाते हैं । कभी कभी अभक्त भी कुछ ऐसे गीत गाते हैं कि मन सहज ही कहता हैं कि इश्वर सबका हैं । श्री रामानंद सागर की रामायण में जब लक्ष्मण जी लिए हनुमान जी संजीवनी लेने गए तो रस्ते में रावन का भेजा हुआ कालनेमि माया से हनुमान जी को भ्रम में डालने की कोशिश करता हैं । उसका भजन देखिये :-
पहले हनुमान जी को दिखाने के लिए भजन गाता हैं
राम श्री राम जय जय राम श्री राम मैं तो राम ही राम पुकारूँ
श्री राम नहीं मोरी सुध लीन्ही मैं कब से राह निहारूं
फिर हनुमान जी को संबोधित भी कर देता हैं
बटेहू जाने वाले श्री राम प्रभु के मतवाले
तू राम नाम रस पी ले तन मन की प्यास बुझा ले

फिर पृष्ठभूमि में गीत उभरता हैं
कपि के कानो में पड़ा राम राम जय राम
उतरे हनुमत जानकार रामभक्त का धाम
फिर हनुमान जी को अपनी अंतर्यामी शक्ति का रौब दिखाते हुए नाम लेकर पुकारता हैं और कहता हैं की वो त्रिकाल दर्शी हैं , वो सब जानता हैं और भजन ये हैं :-
मेघनाद ने शक्ति मारी हैं ,तेरा राम बड़ा दुखारी हैं
तुझे एक वैद्य ने पठाया हैं तू संजीवनी लेने आया हैं
किते से आवे किते को जावे बाबा ने सब बेरा रे
जानो हैं बड़ी दूर बटेऊ कर ले रैन बसेरा रे
पर हनुमान जी आराम करने के लिए मना करते हैं और कहते हैं कि हे भगवन मुझे प्रस्थान की आज्ञा दें ।
फिर कालनेमि कहता हैं :-
यही भगवन की आज्ञा हैं तू आज यही विश्राम करे
तू क्यों चिंता करता हैं जो करना हैं सो राम करे
राम लखन के जीवन में कभी होगा नहीं अँधेरा रे
पर हनुमान जी फिर भी तैयार नहीं हुए तो उसने कहा कि स्नान करके आओ मैं पल भर में में उस पर्वत तक पहुंचा दूंगा जहाँ संजीवनी हैं , वो कहता हैं

तुझे भूख प्यास नहीं लागे मैं ऐसा मन्त्र बता दूंगा
तुझे जिस पर्वत पे जाना मैं पल भर में पहुंचा दूंगा
स्नान ध्यान करके तू आजा तोहे बना लू चेरा रे

इसके बाद का तो आपको पता ही होगा की हनुमान जी ने इस राक्षस और एक पूर्व जन्म की अप्सरा, इस जन्म की मादा मगरमच्छ का उद्धार कर दिया .

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